जब भी मुझे याद आते हैं,
आँखो में ऑशु और होठों पे हसी दे जाते हैं.
वो नन्हा बचपन वो छोटी सरारते ,
वो बहिनों से लड़ना वो भाई से झगड़ना,
वो छोटी छोटी बात पर गुस्सा हो जाना,
वो पापा का हसाना , वो माँ का मनाना,
वो मेरी हर जिद पापा का पूरा करना.
वो दोस्तो के साथ खेलने के लिए,
स्कूल न जाने के बहाने बनाना.
बचपन के वो दिन जब भी याद आते हैं ,
बस एक पल में ही घर की सैर कराते हैं.
ज़िंदगी के वो खुबसूरत पल जब भी याद आते हैं,
आँखो में आसु और होठों पे हसी दे जाते हैं...
2 comments:
Superb
Supperb..
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