मैं पैसा हूं बताओ मैं कैसा हूं ..
एक गरीब की झोपड़ी में या,
किसी अमीर के महल लॉकरो में,
मैं बड़े शान से रहता हूं मैं पैसा हूं..
मेरे लिए सब मेहनत करते,
मुझे पाने को सब बेचैन रहते.
कोई रातों की नींद खो देता,
कोई दिन का चैन भी खोता है..
जिसे भी देखो इस संसार में, मेरे लिए ही रोता है ..
किसी के पास में मेहनत से जाता,कोई छल कपट से मुझे पाता है..मेरी चाहत में कोई इतना गिर जाता,कि अपनों का खून भी बहाता है..देख मानव की यह दशा , मुझे भी रोना आता है ..
मैं तो बस जरिया हूं दो वक्त की रोटी का
भूखे की भूख मिटती प्यासे की प्यास
बस कुछ समय तक रहता हूं मैं किसी के पास
क्यों लोग इतना भागते हैं मेरे पीछे, क्यों अपनों को खो देते हैं..
मैं साथ नहीं जाता किसी के,
क्यों समझ नहीं पाते हैं ..
क्यों दूसरों को दुख पहुंचाते ,
क्यों पैसा पैसा करते हैं .
बड़ा दुखी होता हूं मैं कि,
लोग मेरे लिए लड़ते झगड़ते हैं..
मैं पैसा हूं बताओ मैं कैसा हूं मैं पैसा ही हूं...

5 comments:
Beautiful lines
I like this post... Seriously superb 👍👌👌
NIce
NiCe PoEm
Supperb...
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