उच्च निच्च डनॉ खानोक बात बड़ी निराली छू।
खटटे मीट्ठे फलफुले कि या भोते बछारे छू ,
देवी देवताओंक वास छु या गंगा की बहारे छू।
प्यार बसी छू सबुके मन मा एक दुसरेक फिकर छू,
भलो भोल् म्योर पहाड़क रीति रिवाज छू।
त्यार व्यारो में सब मिलजुल बेर त्यार मनूनी,
मिलजुल बेर दगड़ मंदिर जानी भगवानों के पूजनी।
म्यर् पहाड़ में ठण्डी हवा छ ठण्डो ठण्डो पाडी,
जब ले आला मेरो पहाड़ सूनला कई कहाँड़ी।
हरि भरी पहाड़ छ म्यर् या भोते छु हरियाली,
ठण्डो मीठो पाडी और याक् छू बात निराली।
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